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मुहर्रम के रोजे क्यों रखे जाते है

दोस्तों आप का स्वागत है।हमारी website onlinehindiadvice .com पर दोस्तों आज हम आप के लिए लाया हूँ एक नया आर्टिकल जिसका नाम है मुहर्रम के रोजे क्यों रखे जाते है

अफ्फान रजियललहू  अन्हु से रेबयात है की नबीए  करीम सल्लल्लाहु अलैहि  ब  सल्लम ने फ़रमाया अकरिमु शहूरल – लहि मोहर्रम  यानि मोहर्रम इस्लाम का महीना है एक हदीस में रजब को शहरूल्लाह  ‘कहा गया है जिसने मोहर्रम की बुजर्गी  की उस को अल्ल्हा ताला जन्नत अता करेगाऔर दोजख से नजात देगा माबूद की इबादत में कमरबस्ता रहो रात को क़ियाम करो दिन को रोजा रखो। हुजूरे अनबर सल्ल ने फ़रमाया रमजान के रोजो के बाद मुहर्रम के रोजे सबसे अफजल है चूकि यह अल्लाह का महीना है।सब नाबाजो  में अच्छे फ़जो के बाद मोहर्रम के सब की नमाज है हुजूरे अनबर सलहु ने फ़रमाया जो शख्स रमजान के महीने  के रोजे रखता है बह मोहर्रम के भी रोजे रखे शहरूल्लाह है हुजूरे अनबर ने फ़रमाया जिस  ने मोहर्रम की पहली तारीख को रोजा रखा उसको एक साल के रोजो का साबाब मिलता है पचास साल के गुनाह माफ़ होते है हुजूर अनबर साल्ल० ने फ़रमाया जिस ने आखिर जिलिहज्ज  को और मोहर्रम की पहली तारीख से दस तारीख तक और मोहर्रम के आखिर महीने के रोजे रखे उसको जनन्त में तीस शहर इनायत होगे हुजूर सल्लo ने फ़रमाया जिसने पहली मोहर्रम से दस मोहर्रम तक रोजे रखे उसको हजार बर्ष खुदा की इबादत का साबाब  मिलता है।

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हुजूर अनबर ने फ़रमाया जो दोजख की आग से बचना चाहे बह मोहर्रम के दस रोजे रखे अल्ल्हा दोजख कीआग हराम कर देगा हुजूर अनबर ने फ़रमाया जो शख्स मोहर्रम की पहली रात को आठ रकत नफिल नमाज चार सलाम से पड़े और हर रकअत में बाद ”अलहम्दु ”के दस बार सूर इख्लास पड़े अल्ल्हा ताला उसको तमाम गुनाह बख्स देता है और हर रकअत के बदले एक साल की इबादत का शबाब देता है जो शख्स मोहर्रम की पहली शब चार रकअत नफिल नमाज पड़े हर रकअत में बाद ”अल्हम्दु ;के सूर इख्लास ग्यारह बार पड़े अल्ल्हा ता अला उसको हर रकअत के बदले एक साल का सबाब इनायत करेगा।  जो शख्स दो रकअत नफिल नमाज पहली रात में पड़े हर रकअत में सूर इख्लास सात बार पड़े अल्ल्हा तआला उसके नामय आमाल में सौ बर्ष की इबादत का शबाब लिखता है।जो मेरे हुसैन से मोहब्बत करे गा बो इस्लाम से मोहब्बत करेगा

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Mohammad Rihan

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