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Kyu Manate Hai Holi ka Tyohar – Why do Holi celebrate of Festival

onlinehindiadvice.com की तरफ से होली की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाए  आज हम बताने जा रहे हैं कि होली क्यों मनाई जाती है इसके पीछे कारण क्या है रंगों का क्या मतलब होता है दोस्तों हर इंसान अपने अपने मजहब के हिसाब से अपना अपना त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं इनमें से एक त्यौहार यह है होली का त्यौहार जिसे हिंदू धर्म में मनाते हैं बहुत ही धूमधाम से होली का त्यौहार बहुत ही खुशी का होता है. जब कोई भी व्यक्ति होली के त्योहार की बात सुनता है तो मन में एकदम खुशी छलक जाती है.

इस त्यौहार में बड़े हो या छोटे हो सबको बहुत खुशी होती है सब को मनाते हैं धूमधाम से मिल मिल कर और झूम झूम के बच्चे भी  खुश और बढ़े भी बहुत खुश होते हैं इस त्यौहार पर इसलिए इस त्यौहार को सब खुशियों का त्यौहार भी कहते हैं हमारे भारत देश में मतलब पूरे विश्व में दूसरा और कोई भी देश नहीं जहां लोग एक साथ मिलकर बिना किसी भेदभाव के भाईचारे के साथ त्यौहार का लुफ्त उठा सके मगर हिंदुओं का प्रमुख प्रचलित वार यह है.

होली का त्यौहार यह मिल मिल के झूम झूम के प्रेम से मनाते हैं जिसकी वजह से यह एक दूसरे के प्रति प्यार जगाता है हमारे यहां जितनी भी त्यौहार मनाते हैं उन सब के पीछे कोई ना कोई एक सच्ची पौराणिक कहानी मतलब कथा छिपी हुई होती है ऐसी इस त्यौहार   के पीछे भी रंगो के खेलने के पीछे भी बहुत बड़े एक कहानी है जिसे आज मैं इस आर्टिकल में बताऊंगा बहुत ही अच्छा तरीके से

होली एक ऐसा त्यौहार है जो हिंदू धर्म के लिए बहुत ही खुशी का तोहार होता है होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होता है इस दिन लोग आपस में रंग और पानी सकते हैं और एक दूसरे को होली की बधाइयां देते हैं बच्चे हो या बड़े हो सब इस बार में नाचते गाते खूब मजा करते हैं ढोल नगाड़े लो स्पेशल जोर जोर से गाने बजाते हैं होली मनाने के एक रात पहली होली को जलाया जाता है इसके पीछे एक पौराणिक कथा है

होली क्यों मनाते हैं

होली का त्यौहार एक पौराणिक कथा में से एक त्योहार है वैसे तो इनकी बहुत से प्रचलित कहानी है जन से सबसे प्रसिद्ध कहानी यह है माना जाता है की बहुत समय पहले प्रह्लाद और उनकी भक्ति की माना जाता है कि प्राचीन काल में एक बहुत बड़ा हिरणकश्यप नाम का एक बलशाली असुर रहा करता था जिसे बिरहा देव द्वारा यह वरदान मिला था कि उससे कोई इंसानियत कोई जानवर कोई भी जानवर जंगल का हुआ नहीं मार सकता ना ही किसी अस्त्र-शस्त्र से ना घर के बाहर ना अंदर ना ही दिन में और ना ही रात में ना ही धरती में ना ही आकाश में असुर के पास ऐसा शिव शक्ति होने की वजह से वह इतना घमंडी हो गया कि बहुत से घमंड हो गया था .

और भगवान की वजह खुद को ही भगवान समझता था अपने राज्य के सारे लोगों से कह दिया था कि भगवान विष्णु की पूजा ना की जाए अगर जो कोई भगवान विष्णु की पूजा करेगा तो उसे मृत्युदंड दी जाएगा और वह अपने राज्य सैनिक को पर बहुत अत्याचार करने लगा था क्योंकि वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था और यह भी बताया जाता है कि यह बहुत ही शक्तिशाली था जिससे यह सब पर हक जमाया करता था और सब डरने सैनिक लगे इसकी आहट से

अपने भाई का बदला लेने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की आखिर कर उसे वरदान मिल ही गया था लेकिन इससे हिरण कश्यप खुद को भगवान समझ में लगा था खुद को भगवान की तरह पूजा करवाने लगा था दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम सरल हाथ था और वह भी भगवान विष्णु का परम भक्त था प्रह्लाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना हमेशा उनका कहना डाला था कभी उनका कहना नहीं माना था क्योंकि भगवान विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था बहे हमेशा भगवान विष्णु की पूजा करता था बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय लिया था.

एक बार उसने हाथी को भेजा था दबाने के लिए मगर भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद फिर बच गया था हिरण कश्यप सोचने लगा कि मैं इसे कैसे मारूं उसने एक बहुत बड़ी योजना एक और बनाई उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि तू प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ जाए इस तरह हिरण कश्यप ने भक्त प्रह्लाद को मारने का प्लान तैयार कर लिया था हरियाण कश्यप की योजना प्रह्लाद को जलाकर मारने की थी लेकिन उसकी यह जना कभी सफल नहीं होगी क्यों किसलिए प्रल्हाद भगवान विष्णु का बहुत ही बड़ा भक्त है हिरण कश्यप बहुत ही बढ़ा जालिम था उसने अपने पुत्र को तक नहीं बख्शा था अब होलिका को प्रह्लाद को लेकर भाग में बैठना था क्योंकि होली का अगर आग में बैठेगी तो लिखा नहीं जलेगी क्योंकि होली का कवि भगवान शिव द्वारा एक वरदान मिला था.

जिसमें उसे एक बस्तर मिला था जब तक होलिका के तन पर व्यस्त रहेगा तब तक होलिका को कोई भी आग नहीं जला सकती हिरण कश्यप ने एक जान रचा होली का कोई आदेश दिया कि वह प्रह्लाद को अपने गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होली का जन्म नहीं सकते उसे वरदान मिला है और उसने सोचा था की प्रह्लाद उस आग में जलकर भस्म हो जाएगा जिससे सब को यह सबक मिलेगा कि अगर उसकी बात अगर किसी ने नहीं मानी तो उसे मृत्युदंड मिलेगा जब होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर आगे आपकी तरफ बढ़ी जब आग में बैठी तब भगवान विष्णु का जाप करते रहे पर लात की जबान से भगवान विष्णु का नाम नहीं गया.

वह भगवान विष्णु का नाम लेते रहे भगवान विष्णु ने भी एक योजना बनाई तूफान आया जिससे होलिका के शरीर से लिपट बस उड़ गया और आग से जलने का वरदान पाने वाली होली का भसम हो गई वहीं दूसरी और भक्त परलाद आग देर से छुआ तक नहीं तब से लेकर आज तक हिंदू धर्म के लोग जिनको बुराई पर अच्छाई की जीत की असम में मनाते हैं इस दिन से ही होली की शुरुआत हुई थी

रंग होली का भाग कैसे बना था

यह कहानी भगवान विष्णु के अनुसार भगवान विष्णु के समय तक जाती है माना जाता है कि पहले भगवान विष्णु रंगों से होली बनाते थे इसलिए माना जाता है कि होली का त्यौहार रंगों के रूप में लोकप्रिय हुआ वृंदावन और गोकुल में अपने साथियों के साथ होली मनाते थे पूरे गांव में खूब शैतानियां करते थे इतनी शैतानियां हद से ज्यादा सब को परेशान करते थे आज भी वृदावन जैसी मस्ती भरी होली कहीं पर भी नहीं मनाई जाती है होली 1पसंद का त्यौहार है इसके आने पर सर्दियां खत्म होती है कुछ सोमेश्वर का संबंध फसल पकने से भी है किसान अच्छी फसल पैदा होने की खुशी में होली मनाता है होली का बसंता उत्सव भी कहा जाता है.

होली के रंग

माना जाता है पहले बहुत ही महत्वपूर्ण होता है बरसों पहले होली के रंग देशों और पालाश के फूलों से बनाते थे इन लोगों को गुलाल कहते थे गुलाल में केमिकल का उसे नहीं होता था इसलिए गुलाल त्वचा के लिए बहुत ही अच्छा रंग होते थे लेकिन आज के समय बढ़ने के साथ ही रहो की परिभाषा भी बदल दी जा रही है आजकल गुलाल बनाने के लिए गुलाल कंपनियां बहुत से रसायनिक का प्रयोग करती है जो हमारी त्वचा के लिए बहुत ही नुकसानदायक होते हैं यह रसायन से युक्त हो लाल हमारी त्वचा और आंखों के लिए बहुत ही हानिकारक साबित होते हैं इसलिए इन सभी रसायन रंगों से दूर ही रहना चाहिए और इस पवित्र तोहार को इसके ओरिजिनल रूप में मनाना चाहिए ताकि प्यार और आदर और सम्मान का त्योहार प्यार भरा रंग ही भरना चाहिए

होली का महत्व क्या है

होली का त्यौहार अलग अलग तरीकों से मनाया जाता है कहीं-कहीं 2 दिन तक मनाया जाता तो कहीं 7 दिन तो कहीं 8 दिन फिर महीना भर इसलिए तो भारत को अनेकता में एकता के लिए जाना जाता है हाल अलग तरीके के बावजूद सब एक है वृंदावन और गोकुल में तो महीने भर पहले से ही होली का त्यौहार शुरू हो जाता है वृंदावन की होली प्रसिद्ध है हजारों विदेशी में मान हर साल वृदावन में आते हैं और यहां की होली का आनंद उठाते हैं भारत भारत की पवित्र पौराणिक पुस्तकों जैसे पूरा दस कुमार चरित संस्कृत नाटक में होली के संस्थापक लोग सड़कों पर को समुद्र केंद्र और मंदिरों के आसपास के क्षेत्र में होलिका दहन की रसम के लिए लकड़ी गोबर के कंडे आग लगाते हैं.

और घरों की साफ-सफाई भी कहते हैं कि मालपुआ और भी बहुत सारे दे दी होली पूरे भारत में हिंदू के लिए एक बहुत ही बड़ा त्यौहार माना जाता है जो इस समस्या से पहले कई सदियों से मजबूत है अगर इससे पहले की होली की बात करें तो यह तोहार विवाहित महिलाओं द्वारा पूर्णिमा की पूजा द्वारा परिवार के अच्छे के लिए मनाई जाती थी फिर चीन के अनुसार जमाने के पीछे कई केवा दंतिया रही हैं होली एक हिंदू के लिए एक संस्कृत धार्मिक और पराग्वे प्रारंभिक त्योहार है होली शब्द होली का से उत्पन्न होता है.

होली का त्यौहार विशेष रूप से भारत के लोगों द्वारा मनाया जाता है जिसके पीछे बड़ा कारण है एक बड़ा कार्य की इतवार केवल रंगों का नहीं बल्कि भाईचारे का भी है एक दूसरे से प्यार बढ़ता होली का त्यौहार एक ऐसा त्यौहार है जो हर देश का हर प्रांत बड़ी धूम-धाम से मनाते है अलग-अलग प्रांतों में उनके संस्कृतिक अनुसार इसी नीति नीति से मनाया जाता है यह त्यौहार हमें जीवन में सबके साथ प्यार बांटने को मौका देता है.

किस तरह अपने शरीर से रंगो को मिटाएं

सबसे पहले तो आपको ही करना चाहिए अच्छे तरीके से अपने पूरे शरीर को पहले ही moisturise. कर ले फिर उसके बाद तेल के इस्तेमाल से जिससे कोई भी रंग हमारे चेहरे पर सिलेक्ट नहीं करें इससे हमें आसानी से से धो सकते हैं बालों के लिए भी आप तेल का इस्तेमाल कर लिया सर पर टोपी लगा सकते हैं जिससे आपके बालों को रंग को नुकसान नहीं पहुंचा जा सके जितना हो सके ऑरेंज कलर जैसे की फूड का इस्तेमाल करें अगर हम केमिकल के लोगों को ज्यादा इस्तेमाल करेंगे तो हमारे चेहरे पर हानिकारक हो सकते हैं ज्यादा से ज्यादा सूखे रंग का इस्तेमाल करें जिससे कि आसानी से साफ हो जाए

होली का समारोह

इक दिन का नहीं होता है कि तुम और कहीं राज्यों में यह 3 दिन तक मनाया जाता है पूर्णिमा के दिन एक थाली में रंगों को खूब अच्छी से सजाया जाता है और परिवार का सबसे बड़ा व्यक्ति मां के सदस्यों पर रंग सकता है इसे पुणे में भी कहा जाता है इस दिन होलिका के चित्र जलाते हैं और होलिका और प्रहलाद की याद में होली भी जलाई जाती है देवता के आशीर्वाद के लिए मां अपने बच्चों के साथ जलती होली के पांच चक्कर भी लगाती हैं इस दिन को पर्व भी कहा जाता है और यह होली का उत्सव का अंतिम दिन होता है इस दिन एक दूसरे पर रंग और पानी फेंका जाता है भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां पर भी रंग डाल कर उनकी पूजा की जाती है

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Mohammad Rihan

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