> Lohri kyu Manaate Hai
Festival

लोहड़ी क्यों मनाते हैं Lohri kyu Manaate Hai in Hindi 2019

लोहड़ी की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं:- Onlinehindiadvice.com पर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि लोहड़ी क्यों मनाई जाती है वैसे तो दोस्तों हमारे देश में हर  बहुत त्यौहार ही खुशी से मनाया जाता है .चाहे वह दिवाली हो या होली हो ईद हो मतलब कोई भी त्यौहार हो हर इंसान अपने  को त्यौहार अपने अपने रीति रिवाज से  मनाते हैं. आज मैं आपको बताऊंगा कि लोहरी क्यों मनाते हैं लोरी उत्तर प्रदेश में मनाए जाने वाला प्रसिद्ध त्यौहार है.

 

नया साल आते ही चारों तरफ लोहड़ी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं मकर संक्रांति के 1 दिन पहले 13 जनवरी को यह त्यौहार मनाया जाने वाला है बच्चे बड़े छोटे बड़े सब खुशियां मनाते हैं हंसते हैं नाचते हैं गाने गाते हैं इस सवाल में गाने के लिए इस बार का इंतजार हर किसी के बेसब्री से रहता है इस दिन आग जलाकर उसमें मूंगफली रे वडियां और तिल की आहुति डालकर पूजा की जाती है जिन लोगों के घरों में कोई बच्चे की पैदाइश होती है .

चाहे वह लड़का हो या लड़की या किसी की शादी हुई हो वह अपने रिश्तेदारों को बुलाकर यह  बहुत धूमधाम से मनाते हैं गाते हैं पंजाबी लोग इस त्यौहार को दिन जिंदा और भांगड़ा डालकर खुशियां मनाते हैं दोस्तों यह त्यौहार तो हर पंजाबियों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार है नाचने कूदने का इस त्यौहार में भांगड़ा करते हैं बहुत ही धूमधाम से बच्चे औरतें छोटे बड़े सब बहुत ही धूमधाम से नाचते हैं गाते हैं खाते हैं यह  त्यौहार  और बहुत ही नाचने कूदने का है.

जब लोहड़ी का त्यौहार आने के कुछ ही दिन रह जाते हैं तो बच्चे लोकगीत गा गा कर लकड़िया और उपले कट्टे कर लेते हैं फिर कट्टे की गई सामग्रियों को चौराहे के मोहल्ले के किसी खुले स्थान पर आग जलाते हैं. इस बार को पंजाबी समाज बहुत ही जोश खरोश से मनाते हैं गोबर के फूलों की माल बनाकर मन्नत पूरी होने की खुशी में लोरी के समय जलती हुई अग्नि में उन्हें भेंट किया जाता है जिसे पंजाबियों में चरखा चलाना कहते हैं.

यह पंजाबियों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार लोहरी में कुछ बच्चे लोहड़ी का त्यौहार भारत में एक बहुत ही प्रमुख त्यौहार है जिसे लोग अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाते हैं मकर सक्रांति के आसपास मनाया जाने वाला त्यौहार है मकर सक्रांति के कई रूप हैं जिसे अलग-अलग देशों में अलग-अलग रूप में मनाया जाता है लोहरी भी उन्हीं त्योहारों में से एक है यह पंजाब और हरियाणा में धूमधाम के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है लोहरी को तिरोड़ी भी कहा जाता है यह तेल और रोड़ी शब्दों से मिलकर बना है यह लोहड़ी का त्यौहार पंजाबी ही बहुत ही खुशियों से मनाते हैं गीत गाना सीखते हैं और लोरी के त्यौहार पर खूब धूम मचाते हैं.

लोहड़ी का त्योहार क्यों मनाते हैं.

लोहरी का त्योहार इसलिए मनाया जाता है क्योंकि दूल्हा भट्टी नाम का एक बहुत बड़ा डाकू था जो बहुत बड़ी लूटमार करता था गरीब लोगों की मदद करता था उसने मुश्किल समय में सुंदरी और मुंद्री दो अनाथ बहनों की बहुत मदद की थी जिन को उसके चाचा ने जमींदारों को सौंप दिया था दूल्हे ने उन सभी जमीदार ओं को चंगुल से छपवा कर लोरी की इसी रात बहुत बड़ी आग जलाकर उनकी शादी करवा दी थी और एक शेर शक्कर उनकी गोद में डाल कर उन लोगों को विदा करा था माना जाता है इसी घटना के कुछ एक कारण है कि लोग लोहड़ी का त्यौहार मनाते हैं दूल्हा भट्टी आज भी बहुत प्रसिद्ध है लोकगीत सुंदर मुंद्रीय गाकर याद किया जाता है.

लोहरी कब मनाई जाती है और किस समय

लोहड़ी का त्यौहार 13 जनवरी को मनाया जाएगा लोहड़ी का त्यौहार कुछ लोग तो बसंत के आगमन के रूप में मनाई जाती है कई लोग जाड़े की ऋतु के आने के घटक के रूप में मनाते हैं इस दिन किसान अपनी फसल घर लाते हैं और सब मनाते हैं मगर अब ऐसा नहीं होता अब बदल गया पहले मूंगफली या और और रेवड़ी के के साथ मनाते थे मगर आप चॉकलेट और के साथ मनाते हैं लोहड़ी को पंजाब के किसान नव वर्ष के रूप में भी मनाते हैं लोहड़ी पंजाबियों के लिए बहुत ही बड़ा त्यौहार है 13 जनवरी को मनाया जाएगा

लोहड़ी का त्यौहार इस तरह मनाते हैं

लोहरी के कुछ ही दिन पहले बच्चे लकड़िया आग जाने के लिए खट्टी कर लेते हैं लोरी को शाम को आज पड़ोसी को लोग बुलाकर एक खुली जगह पर लकड़ी जलाते हैं लोरी में लोग अपने रिश्तेदारों को बुलाते हैं और जिसके और बच्चे की पैदा होती है फिर किसी की नई शादी होती है उनके घर जाकर उन्हें आशीर्वाद देते हैं और सब लोग लोहरी में सब इकट्ठे होकर नाचते गाते हैं और आदमी के चारों ओर घूमते नाचते गाते हैं रेवड़ी और निखिल और मक्के के दानों की अवधि देते हैं

और यह सब प्रसाद के रूप में सबको हटा भी जाता है आजकल तो आर में ऐसा होता है कि कल पंजाबी हरियाणा में ना रहकर कई जगह से दिल्ली जम्मू-कश्मीर उत्तर प्रदेश के लोग द्वारा बनाया जाता है इस खुशी के त्यौहार को मनाने के लिए लोग अपने नाते रिश्तेदारों को और दोस्तों को पड़ोसियों को इकट्ठा करके खूब नाचते गाते हैं यह तो हार किसानों के लिए बहुत ही महत्व रखता है इसे फसल कटाई का तो हावी माना जाता है सारे लोग दूसरे घरों में जाकर सबको बधाई भी देते हैं और दौड़ लगाने भी बजाते हैं खूब धूम मचाते हैं नाचते हैं

पौराणिक की क्या मान्यता है.

पौराणिक के अनुसार यह तो आज सती के त्याग के रूप में भी मनाया जाता है कथा के अनुसार जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के महायज्ञ में कुतुब आज आत्महत्या की थी तो यह उसी घटना को याद करने के लिए यह त्यौहार मनाया था कई लोगों को यह भी मानना है कि यह तो हार सत कबीर दास की पत्नी लोहे की याद में मनाया जाता है

त्योहार का बदलता हुआ स्वरूप.

समय बदलते हुए त्यौहारों के मैंने भी बदलते जा रहे हैं पहले ऐसा होता था कि लोहड़ी का अंतर देने के लिए मूंगफली और देवरिया बाटी जाती थी मगर अब ऐसा नहीं है इसकी जगह चॉकलेट और गजक ने ले ली है डीजे की धुन में ढोल के मेनू को भी बदल दिया है पहले ढोल बजाए जाते थे मगर अब ऐसा नहीं होता डीजे बस्ती गांव में आयोजित पहले की तरह बच्चे घर घर जाकर गाने गाकर लोहड़ी मनाते हैं.

Share Buttons
0Shares

About the author

Mohammad Rihan

Mohammad Rihan

Hello Friends My Name is Mohammed Rihan and I am the Founder of Online Hindi Advice knowledge in Hindi on This Blog for People. Here on this blog I write about Technology, Blogging, Make Money, Festival and Happy day

Leave a Comment