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क्यों मनाते है महुर्रम Why DO You Believe In Moharram

 

इमाम हुसैन की मोहब्बत में सारी दुनिया भर में मोहर्रम  मनाते है इमाम हुसैन सल्लाहु अलैहि वसल्लम के[ नाबासा] थे  रसूलअल्लाह इमाम हुसैन से बहुत प्यार करते थे हमारे नबी करम सल्लाहु अलैहि वसल्लम कहते थे के मै हु तो इमाम हुसैन है  और इमाम हुसैन है तो मै हु जो इमाम हुसैन से मोहब्बत करेगा बो  मुझसे मोहब्बत करेगा, इमाम हुसैन  अपने नाना जान से बहुत मोहब्बत करते थे जब कोई परेशानी  होते थी तो अपने नाना जान के पास जाते थे एक दिन बोले नाना जान मुझे  घोड़े पर सबारी करना है। तो हमारे आका सल्लाहोअलाइबसल्लम  ने कहा  हुसैन मै तुम्हे  सबारी कराऊंगा घोड़े की मेरे आका ने दोनों घुटने टेके और  दोनों हाथ नीचे जमीन पर रखकर कहा बैठो हुसैन अपने घोड़े पर सबारी करो  रसूलअल्लाह हुसैन से बहुत मोहब्बत करते थे रसूलअल्लाह  कहते थे की हुसैन तुम जन्नत के सरदार हो। तुम्हे दीन पर कुरबान होना है  रसूलअल्लाह  की शहादत के बाद हुसैन तन्हा होगई हुसैन को अपने नाना की बहुत याद आती थी कहते थे नाना जान मुझे तुम्हारी बहुत याद आती  है अपने नाना की याद मेंImage result for muharram

                 इमाम हुसैन की कुरबानी 

रसूलअल्लाह की शहादत के  बाद एक दौर ऐसा आया की यज़ीद घोर अत्याचार करने लगा अपने आप को राजा समझता था उसके ब्यबहार राजाओ की तरहा था मार पीट जो इस्लाम के खेलाफ था पैगम्बर इमाम हुसैन ने उस यज़ीद की बात माने से मना करदिया फिर यज़ीद ने अपने पुत्र से कहा  जाऊ हुसैन को लेके आय इमाम हुसैन राज भबन में पहुंचे यज़ीद ने अपना फरमान रखा  कहा कोई दीन नही कोई रसूल नहीं  किसी ने कुछ नही कहा उस यज़ीद  के दौलत के डर के मारे मगर एक गरीब माँ का लाल और अली का बेटा हुसैन बोला ये यज़ीद तू झूठा है मेरे नाना नही मोहम्मद सल्लाहु ताला अलैहि वसल्लम अल्लाहा  के रसूल है और क़ुरान अल्लहा की तरफ से नजील हुआ है ताकि इन्सान इस्ला कर सके यज़ीद बोला तू मुझे नही जा नता मेरे पास दौलत है तलबार है  सान सौकत है इमाम हुसैन बोले मेरे पास सबर है दीन है सराफत है फिर इमाम हुसैन हज पूरी करने के लिए हज गए यज़ीद ने अपने सैनिक मदीना सरीफ भेज देई मदीना शरीफ़ में कतल होना हराम है इमाम हुसैन को पता चल गया[ बस ]हुसैन रात को अपने नाना जान के मजार पर जाते है कहते है  नाना जान मुझे आप से बात करनी है हुसैन सोजाते है फेर अल्लहा के महबुब सपने में आते है कहते है हुसैन तुम्हे दीन पर कुर्बान होना है तुम्हे अपना सब कुछ दीनने खुदा पऐ  कुर्बान करना है अपने खून के एक एक कतरे से इस्लाम को बढ़ाना है अपने सर को कटबा  कर दोनिया में कुरान को सुनाना है ताकि रोजे महीसर में कोई जे न कहे साके  तुम्हारा झोटा थाImage result for इमाम hussain की क़ुरबानी  

करबला की तरफ चल पढ़े हुसैन

इमाम हुसैन अपने परिबार के साथ करबला चलेगए अपने नाना का बादा पुरा करने जो हुसैन ने अपने नाना जान से बचपन में करा था याज़ीद की फ़ौज 8000 थी हुसैन  की 72  लोग थे यज़ीद की फ़ौज ने हुसैन को चारो  तरफ से घेल लिया तीन दिन से कुछ नही दिया न पानी न खाना हुसैन ने अपने चाहने बालो को बुलाया  और कहा खेमे  में बुलाया और कहा की ये मेरे चाहने बालो जो बहार फ़ौज खड़ी है मेरे नाना रसूलअल्लाह   केदुसमन है। 

दीन को मिटाना चाहते है तुम सब लोग जाओ अपने शहर चले जाऊ जे सब लोग मेरेनाना  जान के दुसमन है दीन को  मिटाना चाहते है तुम सब लोग जाऊ अपने शहर  चले जाऊ जे सब मेरे खून के प्यासे है तुम सब चले जाऊ इमाम हुसैन ने चिराग बुजा दिया फेर जलाया देहख ते है की सब के सब बही बैठे हुए कहते है की हम नहीं जायगे इमाम हुसैन कहते है जाऊ मै तुम्हारी  सब की   जन्नत का दामन  मै हु मै अल्लाह से तुम सब का जन्नत का सादत लेके अल्लाह से मै दूंगा तुम सब जाऊ अपने शहर फिर देख ते है। 

सब अपनी गर्दन पे तलबार रखके कहते है हुसैन से हमें जन्नत का लालच नहीं है हमें अपनी गर्दन कट जाने का गम नहीं है जब हम रोजे महशर में आप के नाना जान सेमिलेंगे तो बो हम से कहेगे मेरे नाबसे हुसैन को ऐसे ही छोड़ दिया जब आप की माँ से मिलेंगे तो कहेगी की मेरे लाल को तलबार के बीच में ऐसे ही छोड़ दिया  तो हम क्या जबाब देंगे हमें आप के कदमो में कुरबान होना है  दस मोहर्रम के सुबहा सुरो हुआ। 

हुसैन ने कहा  अली अकबर अजान दो शैदाने करबला झूम उठा के नमाजे फजर में हुसैन पर हमला होगया एक एक इमाम हुसैन के कदमो पे कभी लहू का हूर आता है तो कभी कासिम के टुकड़े मिलते है[ तारीफ़] में अता है की इमाम हुसैन अपने नाना जान से बहुत प्यार करते थे अपने नाना के शहीद होने के बाद अपने अब्बू जान से कहते है। 

अब्बू जान नाना की बहुत याद आ रही है अली ने कहा  की बेटा नमाज में दुआ करा करो की पैगम्बर  ये हबीब पैदा करे तो अली अकबर पैदा हुए अली अकबर ने कहा अब्बू जान मुझे आप की कदमो में कुर्बान होना है तो इमाम हुसैन ने कहा जाऊ दीन पे कुर्बान हु जाऊ फेर जब अली अकबर के तीर लगता है तो घोड़े से नीचे गेर जाते है इमाम हुसैन की गोद में 18 साल के  है अब्बूजान तीर बहुत चूब रहा है फिर अली के सीने तीर निकलते है। 

अली अकबर कहते है मेरी कुर्बानी कबूल करमेरे खुदा इमाम हुसैन कहते है ये मेरे खुदा मैने अपना बेटा अली अकबर इस्लाम पे करदिया कहते है फ़ौज के सामने कोई है पुरी दुनिया में इस गरीब का साथ देने बाला पुरी फ़ौज सांत रहे गयी फेर 6 महीने का अली असगर अपनी माँ की गोद में से कहते है की मुझे भी इमाम हुसैन के कदमो में कुर्बान होना है इमाम हुसैन को अली असगरदे  दिया इमाम हुसैन कहते है इसे कोई पानी दो यह प्यासा है इसे इसका हलक सुख रहा है इसे पानी पेलौऊ मैदान में आके कहते है तुमहे दुसमनी मुझसे है। 

मेरे नाना के दींन  से है इस 6 महीने के बच्चे क्या दुसमनी है इमाम हुसैन कहते है कि इसे पानी दो मै अपना सर आप की कदमो में रहक दूंगा मगर किसी जालिम ने असगर को पानी नहीं दिया फ़ौज में से एक दुसमन ने कहा  अगर अली असगर खुद पानी मांगेगे तो पानी दुगा हुसैन ने अली असगर को ऊपर उठाया और कहा असगर पानी मागु फ़ौज में से एक ने कहा असगर का निसाना ले तीर से असगर का काम तमाम कर यह अली रसूल है। 

इनमे कोई सक नही है अली असगर पानी मांग लीगे फिर सारी फ़ौज इनके तरफ हुजायगी इस मसूम की अबाज सुनके तीन नोको का तीर अली असगर के सीने में और एक कान में और एक हुसैन के बगल से गुजरा इतना भारी था जहाँ  जहाँ अली असगर जा रहे थे बहा बहा तीर जरिया था इमाम हुसैन ने जै से ही अपने मासूम को देखा कुछ खून निकला कुछ दूद अली असगर के जिसम से निकला इमाम हुसैन ने उस खून को असमान की तरफ फेकना चाहा कुछ आसमान रोया कुछ जमीन रुई फिर खून असगर को अपने चहेरे पे लगा लिए कहा जब। 

मै रोजे महेसर में जाउगा अपने नाना को देखाऊगा नाना  मैने अपने 6 महीने के असगर को दीन पे कुर्बान करदिया इमाम हुसैन तनहा रहे गए फेर कहते है नमाज क़ज़ा मत करना अपने दीन के लिए लड़ते रहना कुरान को बयान करते रहे ना फेर हुसैन के साथ जितने थे सब शैदाने कर्बला के ओर चल पड़े लाइ इलाहा इल्लाह मोहमद रसूल अल्ल्हा की सहादत करते है जो अली के शेर के सामने आता है फ़ना होजाता है जो इमाम हुसैन के सामने आता है फ़ना होजाता है फेर यज़ीद की फ़ौज ने सलहा की जे अब्बास का भाई अली का बेटा है मोहमद मुस्तफा का नाबासा है इससे कोई जीत नही सकता जाऊ दूर से हमला करो ताकि इमाम हुसैन जीत न पाय हुसैन अपने खेमे में गए। 

नबाज पढ़ने गए जब सजदा में गए यजीद की फ़ौज ने घेर लिया यजीद ने सजदे में खंजर मारा हुसैन अपने मासूम लबो से कुछ बोले लगे यजीद समजा हुसैन बदुआ दे रहे है मगर इमाम हुसैन कहे रहे थे नाना जान से काहोगा की नाना मेने अली असगर को कैसे इस्लाम पे कुर्बान करा था इमाम हुसैन कहे रहे थे की मेरी क़ुरबानी कबूल कर खुदा। मेरे खून के एक एक कतरे ने इस्लाम को आजाद कर दिया क़यामत तक।

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